तो जैसे कि हम देख रहे हैं रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार गिर रहा है तो आज हम इस पोस्ट में बात करेंगे की क्यों रुपया इतनी तेजी से लगातार गिर रहा है रुपया गिरने का सबसे मेन कारण है क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार वृद्धि होना, क्रूड ऑयल की प्राइस पिछले कुछ टाइम से तेजी से बढ़ रही हैं जिससे क्रूड ऑयल का भाव $80 पर बैरल से ऊपर चले गया है इंडिया अपनी जरूरत के 81% ऑयल को इंपोर्ट करता है और जब क्रूड ऑयल का भाव बढ़ जाता है तो इंडिया का आयल बिल भी बढ़ जाता है क्रूड ऑयल को डॉलर में खरीदा जाता है इसलिए क्रूड ऑयल खरीदने के लिए इंडिया को डॉलर खरीदने पड़ते हैं यानी कि इंडियन करेंसी को डॉलर में कन्वर्ट करना पड़ता है तो जब क्रूड ऑयल का भाव बढ़ जाता है तो इंडिया का ऑयल बिल भी बढ़ जाता है जिसकी वजह से इंडिया को ज्यादा डॉलर खरीदने पड़ते हैं यानी कि ज्यादा इंडियन रूपी को डॉलर में कन्वर्ट करना पड़ता है जिससे की डॉलर की डिमांड बढ़ जाती है तो जब डॉलर की डिमांड उसके सप्लाई से ज्यादा हो जाती है तो डॉलर की वैल्यू बढ़ने लगती है और इंडियन रूपी की वैल्यू गिरने लगती है और फिलहाल यही हो रहा है बढ़ते क्रूड ऑयल के भाव की वजह से इंडिया का क्रूड ऑयल बिल भी बढ़ रहा है जिसका सीधा असर इंडिया के करंट अकाउंट डेफिसिट पर हो रहा है जब किसी देश का टोटल इंपोर्ट उसके टोटल एक्सपोर्ट से ज्यादा हो जाता है

तो उसे करंट अकाउंट डेफिसिट कहते हैं और ये करंट अकाउंट डिफिसिट किसी भी इकोनामी के लिए अच्छी नहीं होती जैसे कि हमने बात की इंडिया क्रूड ऑयल काफी बड़ी मात्रा में इंपोर्ट करता है ठीक उसी तरह बाकी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी इंडिया बाहर देशों से इंपोर्ट करता है जिसके मुकाबले इंडिया का इंटरनेशनल एक्सपोर्ट बहुत ही कम है जैसे कि हम जानते हैं इंटरनेशनल ट्रेड में यूएस डॉलर एक मैन करेंसी है और बिल पे करने के लिए इंडिया को डॉलर खरीदने पड़ते हैं जिससे डॉलर की डिमांड बढ़ जाती है और इंडिया को बिल पे करने के लिए इंडियन रूपी को डॉलर में कन्वर्ट करना पड़ता है जिसका असर सीधे सीधे इंडियन रूपी पर पड़ता है यानी कि डॉलर का आउटफ्लो ज्यादा है और इनफ्लो कम है जिससे इंडिया के डॉलर का रिज़र्व भी कम हो जाता है डॉलर रिजर्व के मामले में चाइना नंबर वन पर है जिसके पास डॉलर का 3210 बिलियन डॉलर रिजर्व हैं. वहीं इंडिया के पास कुल 403 बिलियन डॉलर का रिज़र्व है और यदि इसी तरह इंडिया का इंपोर्ट बढ़ता रहा तो आने वाले समय में इंडियन रूपी और भी तेजी से गिर सकती है

इकोनामी तंदुरुस्त रहने के लिए उस देश का एक्सपोर्ट इंपोर्ट से ज्यादा होना चाहिए जब एक्सपोर्ट इंपोर्ट से ज्यादा होता है तो उसे करंट अकाउंट सरप्लस कहते हैं और करंट अकाउंट सरप्लस में डॉलर का इनफ्लो ज्यादा होता है और आउटफ्लो कम होता है जिससे रूपी अप्रिशिएट होने में मदद होती है इसलिए इंपोर्टेंट है कि देश को अपने रिसोर्सेज का सही इस्तेमाल करना चाहिए और अपना फोकस करंट अकाउंट सरप्लस पर रखना चाहिए पिछले कुछ टाइम से फॉरेन इन्वेस्टर भी इंडियन मार्केट से पैसा निकाल रहे हैं और इससे भी इंडियन करेंसी पर असर पड़ रहा है किसी करेंसी की वैल्यू कई सारे फैक्टर पर डिपेंड करती है जिसमें से हमने कुछ पर बात करी, जब रूपी वीक हो जाता है यानी कि कमजोर हो जाता है तब आरबीआई यानी कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इसमें इंटरफ़ेस करती है जब रूपी कमजोर होने लगती है तो आरबीआई अपने पास जो यूएस डॉलर रिजर्व है उसे बेचकर डॉलर की सप्लाई बढ़ाती है ताकि डॉलर की बढ़ती डिमांड ज्यादा सप्लाई के साथ मैच हो जाए और रुपए की गिरावट रुक जाए

आजादी से पहले ₹1 की वैल्यू $1 से ज्यादा थी और आजादी तक एक रुपए की वैल्यू $1 के बराबर थी लेकिन अब $1 की वैल्यू ₹73 से ज्यादा है इसी को देखते हुए इंडिया ने एक ब्रेव कदम उठाया है और वह कदम है इरान से क्रूड ऑयल खरीदना, आपको मालूम होगा यूएस सैंक्शंस का खतरा इंडिया पर मंडरा रहा है लेकिन फिर भी इंडिया ईरान से तेल खरीद रहा है ऐसा करने से इंडिया को ईरान से तेल डिस्काउंटेड दामों पर मिल जाएगा जिससे तेल का रेट कम हो पाएगा. आपको बता दें कि यूएस ने ईरान से तेल खरीदने पर यूएस डॉलर का ट्रेड खत्म कर दिया है जिसके कारण 4 नवंबर से कोई भी कंट्री यूएस डॉलर में ईरान से तेल नहीं खरीद पाएगी इससे होगा क्या भारत को तेल खरीदने के लिए यूरो का इस्तेमाल करना पड़ेगा और यदि यूरो इससे पीछे हटता है तो तेल खरीदने के लिए इंडियन रूपी का इस्तेमाल होगा यह कदम उठाते हुए इंडिया ने दिखा दिया है कि वह सैंक्शंस के डर से अपनी फॉरेन पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं करेंगे और जो देश के हित में सही होगा वही कदम उठाएंगे.

ईरान और भारत के बीच तेल खरीदने का रीजन काफी बड़ा है जिसे हम किसी और वीडियो में जानेंगे लेकिन यह जान लेते हैं कि अगर इसी तरह इंडिया में इंपोर्ट बढ़ता रहा और एक्सपोर्ट कम रहा तो इंडियन रुपी डॉलर के मुकाबले  और भी गिर सकती है भारत के नागरिक होने के नाते हमें यह सोचना होगा कि कैसे हम इंपोर्ट किए हुए माल को खरीदना कम कर सकते हैं और भारत में ही अच्छे क्वालिटी के प्रोडक्ट बना सकते हैं जिससे लोगों को इंपोर्टेड प्रोडक्ट से अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट्स इंडिया में ही मिले. इंडिया के अच्छे फ्यूचर के लिए हमें हम सब को मिलकर इस पर काम करना पड़ेगा और देश के हित में अपना कुछ योगदान देना होगा तो इन चीजों के बारे में सोच कर अपने छोटे मोटे कॉन्ट्रिब्यूशन करते रहिए |

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