दोस्तों ब्रह्मांड में हर सेकंड कई सुपरनोवा विस्फोट होते हैं जो ब्रह्मांड पर बहुत ज्यादा असर डालते हैं और इन सभी चीजों की खबर वैज्ञानिक हमेशा रखते हैं | दोस्तों इसी के साथ वैज्ञानिकों ने हाल ही के कुछ सालों में कई ऐसी खोजे की है जिनके बारे में जानकर आपके होश उड़ जाएंगे और यह इंफॉर्मेशन आपके लिए बहुत काम की साबित होने वाली है तो मैं हूं आपका दोस्त दक्ष और आप देख रहे हैं Gaynpot.com |

Gold Planet

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दोस्तों अभी तक हम सोच रहे थे कि पेट्रोल और डीजल की तरह सोने का निर्माण भी करोड़ों साल पहले मर चुके जीवो के जीवाश्म के कारण ही हुआ था |  लेकिन ऐसा नहीं था क्योंकि वर्ष 2013 में हुई खोज में वैज्ञानिकों ने ये पता लगाया कि सोना पृथ्वी पर ही नहीं बल्कि पूरे ब्रह्मांड में एक दुर्लभ धातु है और आप यह सुन कर चौक जाएंगे कि यह धातु पृथ्वी पर कभी बनी ही नहीं थी | बल्कि कहीं बाहर से आई है | असल में आज से तकरीबन 20 करोड़ साल पहले जब पृथ्वी का निर्माण हो रहा था तब 2 न्यूट्रॉन सितारों के आपस में टकराने की वजह से निकली गामा किरणों से सोने का निर्माण हुआ था | दोस्तों न्यूट्रल तारे , बड़े तारों में सुपरनोवा विस्फोट होने के बाद बचे हुए टुकड़ों को कहा जाता है | इन सितारों की वजह से अत्यधिक मात्रा में गामा किरणें उत्सर्जित हुई | जिससे बहुत बड़े पैमाने पर सोने का निर्माण हुआ टकराव के कारण यह सोना छोटे-छोटे पिंडो के रूप में पूरे ब्रह्मांड में फ़ैल गया | ये इतना सोना था कि उससे हमारे चंद्रमा जैसे 10 चंद्रमा सिर्फ सोने से तैयार किए जा सके | ब्रह्मांड में चारो और फैले सोने के पिंडो में से कुछ पिंड पृथ्वी से इतनी तेजी से टकराए | कि यह पृथ्वी में कई हजार मीटर की गहराई में समा गए है और लंबे समय तक इंसानों की पहुंच से दूर पृथ्वी के गर्भ में पड़े रहे है | इन सितारों की टक्कर से सोने का केवल  0.5 प्रतिशत भाग ही पृथ्वी पर पहुंच पाया था और बाकी का 99.5% चट्टानों के रूप में इंसान की पहुंच से दूर ब्राह्माण में घूम रहा हैं |

7 Planets Like Earth

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दोस्तों खगोल वैज्ञानिक वर्षो से यह पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर ब्रह्मांड में पृथ्वी से बाहर कहीं जीवन संभव है या नहीं इसकी खोजबीन के चलते वर्ष 2017 की शुरुआत में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 1 नए सौरमंडल के बारे में ज्ञात किया | इस सौर मंडल में 1 तारे के इर्द-गिर्द 7 ग्रह चक्कर लगाते हैं | इन सभी ग्रहों के बारे में खास बात यह है कि यहां पानी मौजूद है इसीलिए इन सातों ग्रहों पर जीवन होने की संभावना जताई जा रही है |  trappist-1 नाम के तारे का यह सौरमंडल हमारी धरती से करीब 40 प्रकाश वर्ष दूर है यह दूरी बहुत ही ज्यादा हैं इसीलिए आने वाले समय में शायद यहां पहुंच पाना संभव नहीं है | नासा के मुताबिक इन 7 ग्रहों में से कम से कम तीन ग्रहों पर पानी तरल रूप में मौजूद है और पानी की मात्रा भी 50% से अधिक है नासा इन तीनों ग्रह पर जीवन पाए जाने की अधिक संभावना जता रहा है हालांकि यह तारा आकार में हमारे सूरज के 10% से भी कम है लेकिन यह ग्रह इस तारे के और एक दूसरे के भी काफी नजदीक हैं इसीलिए इन सभी ग्रहों पर जीवन के लिहाज से आदर्श तापमान है | वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तारे के इतने छोटे और कम प्रकाशमान होने की वजह से ही इसके ग्रहों के बारे में दूरबीन की मदद से ज्यादा बेहतर आंकड़े जुटाए जा सकते हैं इसलिए हो सकता है कि इनमें से किसी ग्रह पर जीवन खोजे जाने की घोषणा कर दे नासा जल्द ही कर दे |

Gravity Waves

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महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने आज से करीब 100 साल पहले की गई खोज में यह बताया था कि जब दो ब्लैक होल एक दूसरे के बहुत पास आ जाते हैं तो पहले वह एक दूसरे के आसपास चक्कर लगाते हैं और फिर एक हो जाते हैं और इस प्रक्रिया से अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है जो समस्त ब्रह्मांड के तारों की कुल ऊर्जा से भी अधिक होती है | टकराव के दौरान इन से बेहद शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण तरंगे निकलती है जो प्रकाश की गति से ब्रह्मांड में फैल जाती है और इन्हे रोकना या इन तरंगो के बिच बाधा डालना संभव नहीं है | अगर ऐसी कोई घटना पृथ्वी के नजदीक हो तो यह तरंगे पलभर में ही पृथ्वी के टुकड़े कर सकती है लेकिन सौभाग्य से ऐसी घटना पृथ्वी से अरबो प्रकाश वर्ष की दूरी पर होती है और पृथ्वी तक पहुंचते-पहुंचते यह तरंगे बहुत कमजोर पड़ चुकी होती हैं गौरतलब है कि आइंस्टाइन ने ब्रह्मांड में घटती रहने वाले इन घटनाओं के बारे में 100 साल पहले ही बता दिया था लेकिन 100 साल पहले वह अपनी इस थ्योरी को साबित नहीं कर पाए परन्तु 14 सितंबर 2015 को तीन खोजकर्ताओं ने ग्रेविटी बेब्स को पहचानने वाली लीफो मशीन से इन तरंगों को डिटेक्ट किया | जिस वजह से आइंस्टीन द्वारा ज्ञात की गई 100 साल से भी ज्यादा पुरानी थ्योरी को एकदम सही साबित पाया गया |  ये खोज कितनी महत्वपूर्ण थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खोज करने वाले तीनो वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था |

Wine In Universe

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दोस्तों अब तक वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में अजीबोगरीब खोजे की हैं लेकिन वर्ष 2015 में खोजे गए धूमकेतु ने सभी को हैरत में डाल दिया | इस धूमकेतु का नाम LoveJoy रखा गया है | वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में बताया कि यह धूमकेतु अंतरिक्ष में हर सेकेंड 500 बोतल शराब जितने एल्कोहल को रिलीज करके अपने नाम को सार्थक कर रहा है | शोधकर्ताओं ने कहा कि पहली बार किसी धूमकेतु द्वारा इथाइल एल्कोहल का पता लगा है | इथाइल एल्कोहल एल्कोहल की उस किस्म को कहा जाता है जो शराब में इस्तेमाल की जाती है खोजकताओं ने कहा कि अनुसंधान के नतीजों से धूमकेतु को और भी ज्यादा बल मिलता है कि धूमकेतु जीवन की उत्पत्ति के लिए बेहद जरूरी स्रोत रहे होंगे और यह मुमकिन है कि पृथ्वी पर जीवन शुरुआत होने की वजह भी बाहर से आए किसी धूमकेतु की भूमिका को माना जाता है |

Again 9 Planet

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दोस्तों पहले हमारे ग्रहों की संख्या 9 बताई जाती थी लेकिन वर्ष 2005 में खगोल वैज्ञानिक मार्क ब्राउन ने सौरमंडल में सूर्य के चक्कर काटती एस्ट्रो बेल्ट खोज निकली | जिनमें सैकड़ों की संख्या में छोटे ग्रह मौजूद थे जिनमें से कुछ पत्थरों जितने छोटे थे तो कुछ काफी बड़े थे इसमें से एक ग्रह ub313 था जिसे बाद में जीना नाम दिया गया इसी वजह से ग्रहों की संख्या में मतभेद होने लगे और वर्ष 2006 में अंतरराष्ट्रीय खगोल संघ ने प्लूटो को ग्रह के दर्जे से हटाकर शुक्र ग्रह की श्रेणी में रख दिया लेकिन अभी हाल ही में इस एस्टेरोइड बेल्ट से परे एक और नए ग्रह के होने के आशा जताई जा रही है माना जाता है कि यह एक विशाल गैसीय पिंड है और बेहद ठंडा है हालांकि कुछ खगोल वैज्ञानिक इस खोज को नहीं मानते लेकिन इस खोज की पुष्टि नासा ने भी की है और इस ग्रह को टिका नाम दिया गया है | नासा के अनुसार ये ग्रह बृहस्पति ग्रह से भी 4 गुना ज्यादा बढ़ा है | ये ग्रह हीलियम और हाइड्रोजन गैसों से बना है और हो सकता है कि आने वाले समय में इसे ग्रह का दर्जा मिल जाए और एक बार फिर से हमारे सौरमंडल में पहले की तरह नौ गृह हो जाए |