[ad_1]

इतिहास में कुछ शासक अपने सशक्त शासन के लिए जाने जाते हैं, तो कुछ ऐसे शासक भी रहे हैं, जिन्होंने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी। ऐसे शासकों ने अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए न सिर्फ हर तरह के नियम- कानून को ताक पर रखा, बल्कि दुनिया में मानवता के लिए बड़ा संकट भी पैदा किया। इसी कारण इन्हें सबसे बड़े तानाशाह का दर्जा मिला। आइए जानते हैं इतिहास के 10 उन सबसे क्रूर और खतरनाक तानाशाहों के बारे में, जिन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक तानाशाह माना गया है।

एडोल्फ हिटलर

एडोल्फ हिटलर, जर्मनी की राष्ट्रीय समाजवादी जर्मन कामगार पार्टी (NSDAP) का नेता था और उसके शासनकाल में करीब 1.7 करोड़ लोगों की हत्या हुई थी। उसने लाखों यहुदियों को जिंदा जला दिया था, उसने यहूदी, इसाई, महिलाएं और बच्चों तक पर रहम नहीं खाया।

आपको जानकर हैरानी होगी सबसे ज़्यादा यहूदियों का खून बहाने वाले हिटलर का पहला प्यार एक यहूदी लड़की ही थी। उसने करीब 12 वर्षों (1933 से 1945 तक) जर्मनी पर अपना हुकुम चलाया। उसको द्वितीय विश्वयुद्ध के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार माना गया है।

जोसेफ स्टालिन

जोसेफ स्टालिन, सोवियत संघ का नेता था। उसने 31 साल (1922 से 1953 तक) सोवियत संघ पर अपना हुकुम चलाया। सोवियत संघ की कमान संभालने के बाद ही उसने अपने हर एक विरोधी को मौत के घाट उतार दिया। उसने अपने कार्यकाल में करीब 2.3 करोड़ लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। स्टालिन ने शीतयुद्ध के दौरान रूस को दुनिया का दूसरा परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाया। उसने 1939 में ग्रेट पर्ज के नाम पर सेना की मदद से लाखों हत्याएं करवाईं।

ईदी अमीन

ईदी अमीन, युगांडा (मध्य अफ्रीकी) का शासक था। उसने 8 साल (1971 से 1979 तक) देश पर राज किया। उसे “युगांडा का कसाई” भी बोला जाता था। वह तकरीबन 6 लाख लोगों की मौत का जिम्मेदार था। उसका विरोध करने वाले लोगों को वह प्राइवेट पार्ट्स और हाथ पैर काटना, अपना मांस खाने पर मज़बूर करना, सर हथौड़े से फोड़ देना, बर्फ की चट्टानों पर बिठाना ऐसी सज़ाएं देता था।

सज़ा के बाद मरने वाले लोगों की लाशों को तालाब में फेंक दिया जाता था, जिन्हें मगरमच्छ खाते थे। उसके शासनकाल में महिलाओं के रेप भी हुए और उन्हें टॉर्चर भी किया जाता था। उसकी 5 पत्नियां और दर्जनों बच्चे थे, फिर भी वह सदैव शादी के लिए कम उम्र की लड़की की तलाश में रहता था। उसका मानना था कि कोई भी योग्य लड़की युगांडा के महाराज की धर्मपत्नी बनने के लिए तत्पर रहेगी।

सद्दाम हुसैन

सद्दाम हुसैन 2 दशकों तक (1979 से 2003 तक) इराक का राष्ट्रपति रहा है। सत्ता सम्भालने के बाद वह अपने आप को अरब देशो में सबसे प्रभावशाली समझने लगा था। साल 1980 में उसने नई इस्लामिक क्रांति के प्रभावों को कमज़ोर करने के लिए पश्चिमी ईरान की सीमाओं पर अपनी सेना उतार दी थी। इस युद्ध में लाखों लोगों को जान गंवानी पड़ी थी।

इसी दौरान 1982 में सद्दाम हुसैन ने अपने ऊपर हुए एक आत्मघाती हमले के बाद दुजैल गांव में 148 लोगों की हत्या करवा दी थी। अगस्त 1990 में इराक ने कुवैत को तेल के दामों को नीचे गिराने के आरोप लगाकर उसके साथ जंग छेड़ दी। 1991 में अमेरिकी फौज के दबाव के दखल के बाद इराकी सेना को कुवैत से पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। लेकिन इस जंग में हजारों इराकी सैनिक मारे गए।

बेनिटो मुसोलिनी

बेनिटो मुसोलिनी, इटली का एक राजनेता था, जिसने राष्ट्रीय फासिस्ट पार्टी का नेतृत्व किया। उसने इटली पर तकरीबन 1922 से 1943 तक राज किया। उसने 1925 तक संवैधानिक तरीके से शासन किया। उसके बाद उसने तानाशाही को अपना लिया। उसने 1935 में अबीसीनिया पर हमला कर दिया। दूसरे विश्वयुद्ध के समय से ही उसने कई हमलों में हार का सामना किया।

इस कारण उसे प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा भी देना पड़ा और उसे जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया। उस समय हिटलर ने उसे सहारा देते हुए छुड़ाया, लेकिन फिर भी वह ज़्यादा समय तक सत्ता नहीं संभाल सका और फिर 1945 में मित्र देशों की सेनाओं ने इटली पर हमला किया, जिसमें मुसोलिनी को पकड़ कर हिरासत में ले लिया, फिर 28 अप्रैल 1945 को उसे सज़ा-ए-मौत दी गई।

मुअम्मर अल-गद्दाफी

मुअम्मर अल-गद्दाफी, लीबिया का तानाशाह था। उसने लीबिया पर 42 साल (1970 से 2011 तक) राज किया। गद्दाफी को हमेशा डर बना रहता था कि कोई उसे मार ना दे, इसीलिए वह हर समय बुलेट प्रूफ गाड़ियों में ही घूमता था। वह हमेशा सुरक्षा गार्ड के तौर पर महिलाओं को ही नियुक्त करता था। यूक्रेनी नर्स और सुनहरे बालों वाली अंगरक्षकों जैसे शौक ने जल्द ही उसे विदेशी मीडिया में सुर्खियों में ला दिया था।

उसका शासन सिद्धांत यही था कि अलग-अलग जनजातियों को आपस में भिड़वा दो और राज करो। अपने आलोचकों को उसने मौत के घाट उतरवा दिया। लीबिया पर 42 सालों तक एकछत्र राज करने वाले यह तानाशाह मरने से पहले जान बख्शने के लिए सरकारी सैनिकों के आगे खूब गिड़गिड़ाया। गद्दाफी के आखिरी शब्द थे- ‘मुझे गोली मत मारो’

होस्नी मुबारक

होस्नी मुबारक, मिस्र का तानाशाह था। उसने 1981 से 2011 तक मिस्र पर राज किया। अपने शासनकाल में उसने जनता पर खूब जुल्म ढाए। उसकी क्रूरता की वजह से सभी लोग उसके विरोधी हो गए। एक बार इस्लामी चरमपंथियों ने उस पर जानलेवा हमला भी किया, लेकिन वह वहां से बच निकला। आखिरकार 2011 में जनता ने उसके खिलाफ आंदोलन छेड़ कर उसे सत्ता से बाहर कर दिया। उस पर कई भ्रष्टाचार और हत्या के मामले दर्ज थे, उसे गिरफ्तार कर लिया गया। साल 2012 में उसे उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई।

किम जोंग इल

किम जोंग इल अपने पिता किम इल सुंग की मौत के बाद उत्तर कोरिया की सत्ता पाने वाला वहां का एक बड़ा तानाशाह बन गया था। उसने 1994 से 2011 तक अपनी सत्ता में कई मानव अधिकारों का उल्लंघन करते हुए बड़ी संख्या में लोगों की हत्या करवा दी थी।

उसके शासनकाल में 3 लाख से भी अधिक लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था और लाखों कोरियाई नागरिक उसकी क्रूर नीतियों के कारण मौत के घाट उतारे गए। किम जोंग इल की इस तानाशाही के चलते अमेरिका ने वर्ष 2002 में उत्तर कोरिया को ‘एक्सिस ऑफ इविल’ घोषित कर दिया था।

रॉबर्ट मुगाबे

रॉबर्ट मुगाबे, जिम्बाब्वे का राष्ट्रपति रहा है। उसने 1987 से 2013 तक अपना शासन कायम रखा। उसने सत्ता धोखाधड़ी से ही हासिल की थी। चुनाव के समय कई प्रदेशों से उसे एक भी वोट नहीं मिला था, लेकिन उसने लोगों को डरा धमका कर सत्ता हासिल कर ली थी। चुनावी दौर के समय उसने करीब 20,000 आम नागरिकों की दर्दनाक हत्या करवा दी थी। इसके अलावा अपने शासनकाल में उसने करीब 30 लाख से भी अधिक लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी थी।

माओ त्से तुंग

माओ त्से तुंग, चीन का तानाशाह था। उसने 1949 से 1976 तक शासन किया। उसको करीब 7.8 करोड़ लोगों का हत्यारा कहा जाता है। उसने अपने शासनकाल में दो प्रोग्राम ‘ग्रेट लीफ फारवर्ड’ और ‘कल्चरल रेवॉल्यूशन’ चलाए और इसका परिणाम यह निकला कि इनकी वजह से लगभग 2 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हो गए।

यह भी पढ़ें :-

[ad_2]