ज्योतिष शास्त्र के अनसार हम सभी के जीवन की घटनाएं ग्रहों के द्वारा संचालित होती हैं। जीवन में आने वाले उतारचढ़ाव और बदलती घटनाएं इस बात का प्रमाण होती हैं कि हम सोचते कुछ और हैं और होता कुछ और है। इसका अर्थ यह है कि एक ऊपरी शक्ति है जो हम सभी के जीवन को नियंत्रित करती है। जीवन के साथ ही हमारी जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति निर्धारित हो जाती है।

अशुभ ग्रहों के प्रभाव को शांत के उपाय
अशुभ ग्रहों के प्रभाव को शांत के उपाय

सभी ग्रहों की स्थिति हमारे लिए अनुकूल हो ऐसी संभावनाएं बहुत कम बनती हैं। यही वजह है कि सभी को जीवन में कोई न कोई दुख अवश्य होता है। तभी कहा है कि नानक दुखिया सब संसार’ अर्थात यहां पूरी तरह से सुखी कोई नहीं है। इन दुखों, परेशानियों और दिक्कतों को दूर करने के लिए ज्योतिषीय उपायों का सहारा लेना इन दुखों को कम करता है और राहत देता है। हम इस लेख में लाल किताब के कुछ उपाय बताने जा रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने ग्रहों की अशुभता को कुछ हद तक दूर करने में सफल रहेंगे।

अशुभ ग्रहों के प्रभाव को शांत के उपाय

  • सूर्य ग्रह की शुभता प्राप्ति के लिए नित्य प्रातः सूर्योदय के बाद आदित्य हृदय स्रोत का पाठ करें। पिता की सेवा, सूर्य देव को जल में रोली और लाल रंग के फूल डाल कर अर्घ्य देना शुभ रहता है। इसके अतिरिक्त स्वर्ण-ताम्र, चीनीगुड़ का दान करने से सूर्य ग्रह प्रसन्न होते हैं। बुजुर्गों और पिता तुल्य व्यक्तियों का सम्मान करें।
  • चंद्र ग्रह की अनुकूलता के लिए भगवान शिव का मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करें। जट्टा वाला नारियल, सफेद, चंदन, बिल्वपत्र तथा सफेद मिठाई का भोग लगाने से शंकर भगवान प्रसन्न होते हैं। चंद्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए सोमवार के व्रत का पालन करें, सफेद वस्त्र पहनें और माता का आशीर्वाद लें।
  • मंगल ग्रह के लिए राम भक्त हनुमान जी का पूजन चमेली के तेल, केसरी, सिंदूर और शुद्ध घी से पूजन करें। छोटे भाइयों से रिश्ते अच्छे रखें।
  • देवी दुर्गा जी और श्री गणेश जी का पूजन अर्चन करने से बुध ग्रह की अशुभता में कमी होती है। हरे रंग के धान्य पक्षियों को डालें। हरे रंग की सब्जियों व फलों को जरूरतमंदों को दान करें। संभव हो तो तोता पालें। बुधवार का व्रत का पालन करें। छोटी कन्याओं की सेवा करें, आशीर्वाद लें।
  • बुजुर्गों की सेवा एवं ब्राह्मणों की सेवा करने से बृहस्पति ग्रह की अशुभता दूर होती है। किसी धर्म स्थल में धार्मिक पुस्तकें दान करें। चने की दाल व केसर का दान किसी जरूरतमंद को करें। साथ ही केसर का तिलक माथे पर लगाएं। कुल पुरोहित का सम्मान करें।
  • शुक्र ग्रह की अशुभता प्राप्त हो रही हो तो महालक्ष्मी के मंत्र का पाठ करें। साफ वस्त्र पहनें। जीवन साथी का सम्मान करें। गौ माता की सेवा और पूजन करने से भी शुक्र ग्रह की शुभता बढ़ती है। किसी गौशाला में चारा दान करें और भीगी हुई चने की दाल गायों को खिलाएं। कन्याओं को खीर खिलाएं।
  • शनि ग्रह के लिए भगवान शनि देव का मंत्र जाप और पूजन करें। पीपल के पेड़ को प्रातः जल दें और सार्यकाल में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। किसी जरूरतमंद को काली उड़द की दाल दान करें। शनिवार के व्रत का पालन करें। जहां तक संभव हो ताऊ और चाचा से रिश्ते मधुर बनाए रखें। शनि देव का अभिषेक सरसों के तेल से करें।
  •  राहू ग्रह भगवान भैरो जी के दर्शन और पूजन करने से प्रसन्न होते हैं। देवी सरस्वती जी के मंत्र जाप से भी राहू ग्रह की अशुभता में कमी होती है। खराब बिजली का सामान घर में न रखें। नाना जी से संबंध बेहतर रखें।
  • केतु ग्रह श्री गणेश जी का पूजन करने से प्रसन्न होते हैं। शनिवार के दिन कुत्तों को तेल लगी रोटी खिलाना शुभफलदायक है। किसी धर्मस्थल पर ध्वजा फहराएं।

विशेष

वैदिक ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार शुभ ग्रहों के रत्न पहने जाते हैं, अशुभ ग्रहों की अशुभता में कमी करने के लिए पूजन, मंत्र, व्रत, हवन और रुद्राक्ष धारण किया जाता है। अधिक अशुभता होने पर संबंधित वस्तुओं के दान किए जाते हैं।

-आचार्य रेखा कल्पदेव

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